राष्ट्रीय किसान दिवस महत्व और इतिहास!!!

राष्ट्रीय किसान दिवस महत्व और इतिहास!!किसान दिवस (Kisan Diwas) भारत में प्रत्येक वर्ष 23 दिसंबर को मनाया जाता है। इसे राष्ट्रीय किसान दिवस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिवस का उद्देश्य हमारे देश के अन्नदाता और मेहनती वर्ग किसानों को सम्मान देना और उनकी भूमिका को समझना है। किसान देश की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक विकास का मूल आधार हैं। उनके बिना न तो हम पेट भर सकते हैं और न ही हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत रह सकती है। पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह के जन्मदिन पर मनाया जाता है किसान दिवस। पूर्व पीएम ने किसानों के हित में उठाए थे कई कल्याणकारी कदम। 23 दिसंबर 1978 को किसान ट्रस्ट की हुई थी स्थापना।

23 दिसंबर को ‘किसान दिवस’ है, जो दर्शाता है भारत में किसानों के लिए एक खास दिन समर्पित है। देश में 23 दिसंबर को किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि अन्नदाता की वजह से ही देश कभी भूखा नहीं रहता।

किसानों के सम्मान और उनके प्रति अपना आभार प्रकट करने के लिए इस दिन को ‘किसान दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन का पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह से भी खास कनेक्शन है।

किसान दिवस महत्वपूर्ण जानकारी सारणी (2025)

भारत में किसान दिवस का आयोजन हर साल 23 दिसंबर को किया जाता है। यह दिन हमारे देश के मेहनती और साहसी किसानों को सम्मान देने के लिए समर्पित है, जो हर दिन खेतों में अपनी मेहनत से देश की खाद्य सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाते हैं।

किसान दिवसजानकारी
कब मनाया जाता है?23 दिसंबर हर साल
2025 की तारीखमंगलवार, 23 दिसंबर 2025
क्यों मनाया जाता है?चौधरी चरण सिंह की जयंती और किसानों के योगदान के लिए
मुख्य उद्देश्यकिसान के योगदान को पहचानना व कृषि जागरूकता फैलाना
कैसे मनाया जाता है?सेमिनार, प्रतियोगिताएँ, कार्यशालाएँ व सम्मान समारोह
महत्वआर्थिक विकास और खाद्य सुरक्षा में किसानों की भूमिका

राष्ट्रीय किसान दिवस 2025 की थीम:  किसान दिवस की थीम भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा PIB के माध्यम से जारी की जाती है। फिलहाल, राष्ट्रीय किसान दिवस 2025 की आधिकारिक थीम अभी घोषित नहीं की गई है

किसानों के सामने आने वाली प्रमुख समस्याएँ

1. मौसमी असमानताएँ (Weather and Climate Issues)

किसान अपनी फसल मुख्य रूप से मौसम पर निर्भर करती हैं। अनियमित बारिश, सूखा, बाढ़, तूफान या अत्यधिक गर्मी जैसी परिस्थितियाँ उनकी फसल को बर्बाद कर सकती हैं।
उदाहरण: सूखे की वजह से गेहूँ या धान की फसल आधी से ज्यादा नष्ट हो जाती है।

2. अधूरी सिंचाई और जल संकट (Irrigation and Water Issues)

कई किसानों के पास पर्याप्त सिंचाई की सुविधा नहीं होती। सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने या तालाब/कुंओं के सूखने से फसल प्रभावित होती है।

3. कृषि ऋण और वित्तीय समस्याएँ (Loans and Financial Issues)

कई किसान उधार लेकर बीज, खाद और उपकरण खरीदते हैं। अगर फसल खराब हो जाती है, तो कर्ज बढ़ता जाता है और कई किसान कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं।

4. कम बाजार मूल्य (Low Market Price)

किसानों को अक्सर अपने उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिलता। मंडियों में दलालों या बड़े बिचौलियों के कारण उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) भी मुश्किल से मिलता है।

5. बीज और उर्वरक की उच्च लागत (High Cost of Seeds & Fertilizers)

बीज, उर्वरक, कीटनाशक और मशीनरी महंगे होने के कारण छोटे किसान इन पर खर्च करने में असमर्थ होते हैं।

6. नई कृषि तकनीक की कमी (Lack of Modern Farming Techniques)

कई किसान पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहते हैं और नई तकनीक, कृषि यंत्र या आधुनिक बीज के बारे में नहीं जानते। इससे उत्पादन कम और लागत अधिक होती है।

7. स्वास्थ्य और सामाजिक समस्याएँ (Health & Social Issues)

किसानों को लंबे समय तक खेतों में काम करना पड़ता है, जिससे उनकी सेहत प्रभावित होती है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी भी एक चुनौती है।

किसानों के लिए सरकारी योजनाएँ और समाधान

  1. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) – सालाना ₹6,000 की वित्तीय सहायता तीन किस्तों में।
  2. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) – प्राकृतिक आपदाओं से फसल नुकसान की भरपाई।
  3. सिंचाई योजनाएँ – पर्याप्त पानी और आधुनिक सिंचाई सुविधा।
  4. कृषि तकनीक और प्रशिक्षण – नई बीज तकनीक, जैविक खेती, मशीनीकरण और स्मार्ट कृषि उपकरण।
  5. कृषि ऋण और सब्सिडी – बीज, उर्वरक और मशीनरी खरीदने के लिए वित्तीय सहायता।
  6. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) – किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य सुनिश्चित करना।

यह भी पढ़ें: PM नरेन्द्र मोदी को मिले सर्वोच्च सम्मान

1 comment

Post Comment