भारी जल : Heavy Water (Deutrium Oxide)

इसकी खोज 1931 ईस्वी में अमेरिका के यूरे ने की थी।
* साधारण जल के 6000 भागों में लगभग एक भाग भारी जल विद्यमान रहता है।
* जिसका रासायनिक सूत्र D₂O (ड्यूटेरियम ऑक्साइड) होता है
* साधारण जल का हिमांक जीरो डिग्री सेल्सियस होता है, जबकि भारी जल का हिमांक 3.8 डिग्रीसेल्सियस होता है।
* साधारण जल का क्वथनांक 100 डिग्री सेल्सियस होता है, जबकि भारी जल का क्वथनांक 101.42 डिग्री सेल्सियस होता है ।
* भारी जल का उपयोग नाभिकीय रिएक्टर में न्यूट्रॉन के मंदक के रूप में किया जाता है।
* हाइड्रोजन पराक्साइड – सूत्र – H2O2
* इसका अणुभार 34 होता है।
* दूध ,शराब तथा अन्य पेय पदार्थों को सढने से बचाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
* कठोर और मृदु जल – वह जल जो साबुन के साथ कठिनाई से झाग देता है, कठोर जल कहलाता है।
* वह जल जो साबुन के साथ आसानी से झाग देता है , मृदु जल कहलाता है।
* जल की अस्थाई कठोरता को दूर करने के लिए जल को उबालना पड़ता है।
* जल की स्थाई कठोरता को दूर करने के लिए उसमें सोडियम कार्बोनेट का घोल मिलाते हैं।

Heavy Water

भारी जल के उपयोग

  • ड्यूटेरियम के निर्माण के लिए भारी जल का उपयोग किया जाता है।
  • इसका उपयोग श्वसन और प्रकाश संश्लेषण की क्रियाविधि का अध्ययन करने के लिए अनुरेखक के रूप में किया जाता है।
  • डी 2 ओ का उपयोग एनएमआर (न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस) स्पेक्ट्रोस्कोपी में किया जाता है, जिसका उपयोग परमाणुओं के नाभिक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्रों का निरीक्षण करने के लिए किया जाता है।
  • कई कार्बनिक यौगिकों के समस्थानिक ड्यूटेरियम ऑक्साइड की सहायता से तैयार किए जाते हैं।
  • आईआर (इन्फ्रारेड) स्पेक्ट्रोस्कोपी में सामान्य पानी के स्थान पर अक्सर भारी पानी का उपयोग किया जाता है  ।
  • इसका उपयोग परमाणु रिएक्टर में न्यूट्रॉन की गति को धीमा करने के लिए एक मंदक के रूप में किया जाता है। चूँकि यह तेज़ गति वाले न्यूट्रॉन को धीमा कर सकता है, इसलिए वे 238U समस्थानिक के बजाय  235U समस्थानिक के साथ अभिक्रिया कर सकते हैं ।
  • मनुष्यों और जानवरों में चयापचय दर का परीक्षण D2O और भारी ऑक्सीजन वाले पानी के मिश्रण की मदद से किया जाता है ।
  • नियंत्रित नाभिकीय संलयन अभिक्रियाओं में प्रयुक्त सक्रिय पदार्थ ट्रिटियम, तब बनता है जब भारी जल में उपस्थित ड्यूटेरियम एक न्यूट्रॉन को ग्रहण कर लेता है।

H2O और D2O में क्या अंतर है?

भारी जल (D2O) का आण्विक द्रव्यमान साधारण जल (H2O) की तुलना में अधिक होता है | इसके परिणामस्वरूप भारी पानी के अणुओं में संगणन की मात्रा साधारण पानी की अपेक्षा अधिक होती है | इसके कारण भारी जल का क्वथनांक एवं गलनांक साधारण जल से अधिक होता है |

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