वैभव समेत 20 बच्चों को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025!!!

भारत के उभरते क्रिकेट सितारे वैभव सूर्यवंशी को राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया – जो पांच से 18 वर्ष की आयु के बीच के उपलब्धि हासिल करने वालों के लिए देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है ।

14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से यह पुरस्कार प्राप्त किया और उसी दिन बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।

खेल, नवाचार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, कला और संस्कृति, सामाजिक सेवा या वीरता के उल्लेखनीय कार्यों जैसे क्षेत्रों में असाधारण योगदान को सम्मानित करने के लिए स्थापित बाल पुरस्कार, राष्ट्रीय पुरस्कार प्रणाली के भीतर खेल रत्न के युवा समकक्ष के रूप में कार्य करता है।

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नाम – कैटेगरी – राज्य

1.वाका लक्ष्मी प्रज्ञिका (7 साल) – खेल – गुजरात

    2. योगिता मंडावी (14 साल)- खेल- छत्तीसगढ़

    3.अनुष्का कुमारी (14 साल)- खेल – झारखंड

    4.शिवानी होसुरु उप्परा (17 साल)- खेल – आंध्रप्रदेश

    5.वैभव सूर्यवंशी (14 साल‌) – खेल- बिहार

    6.ज्योति (17साल)- खेल – हरियाणा

    7.धिनिधि देसिंघु (15 साल)- खेल – कर्नाटक

    8.ज्योशना साबर (16 साल) – खेल – ओडिशा

    9.विश्वनाथ कार्तिकेय ( 16 साल) – खेल – तेलंगाना

    10.मोहम्मद सिद्दान (11 साल) – वीरता – केरल

    11.अजय राज (16 साल) – वीरता – उत्तर प्रदेश

    12.ब्योमा प्रिया, मरणोपरांत ( 6 साल) – वीरता – तमिलनाडु

    13.कमलेश कुमार, मरणोपरांत (11 साल) – वीरता – बिहार

    14.ऐशी प्रिशा बोराह (10 साल) – पर्यावरण – असम

    15.पूजा (17 साल) – पर्यावरण – उत्तरप्रदेश

    16.वंश तायल (17 साल) – सामाजिक सेवा – चंडीगढ़

    17.सुमन सरकार (16 साल) – कला और संस्कृति – पश्चिम बंगाल

    18.एस्तेर लालदुहावमी हनामते (9 साल) – कला और संस्कृति – मिजोरम

    19.श्रवण सिंह (10 साल) – सामाजिक सेवा – पंजाब

    20.अर्णव अनुप्रिया महर्षि (17) – विज्ञान और प्रौद्योगिकी – महाराष्ट्र

    चार बच्चों को वीरता पुरस्कार, 2 को मरणोपरांत!!!

    1.अजय राज!

    उत्तरप्रदेश के 9 साल के अजय राज को साहस के लिए अवॉर्ड दिया गया। आगरा के अजय ने अपने पिता को मगरमच्छ की पकड़ से बचाया था। उन्होंने लकड़ी से वार कर मगरमच्छ को मारा था।

    2.मोहम्मद सिद्दान

    केरल के मोहम्मद सिद्दान ने अपने 2 दोस्तों की जान बचाई थी। पलक्कड़ के 11 साल के सिद्दान के दोस्तों को करंट लग गया था। उन्होंने लकड़ी की मदद से उनकी जान बचाई।

    3.व्योमा प्रिया (मरणोपरांत)

    तमिलनाडु की 8 साल की व्योमा ने बच्चों की जान बचाते हुए अपनी जान गंवा दी। व्योमा की मां अर्चना ने बताया कि मैं अपनी बेटी व्योमा प्रिया की तरफ से यह बहादुरी का अवॉर्ड ले रही हूं।

    4.कमलेश कुमार (मरणोपरांत)

    दुर्गावती नदी में एक दूसरे बच्चे के बह जाने पर उसकी जान बचाने के लिए अपनी जान की परवाह किए बगैर नदी में कूद गए। इसमें उनकी जान चली गई। पुरस्कार उनके पिता दुखी शाह ने लिया।

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